गुरु पूर्णिमा विशेष संदेश-"अप्प दीपो भव" — स्वयं अपना प्रकाश बनो
नमो बुद्धाय | गुरु पूर्णिमा विशेष संदेश "अप्प दीपो भव" — स्वयं अपना प्रकाश बनो बुद्धं शरणं गच्छामि। धम्मं शरणं गच्छामि। संघं शरणं गच्छामि। गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर समस्त मानव समाज को भगवान तथागत गौतम बुद्ध के उस अमर संदेश का स्मरण करना चाहिए जिसने मानव इतिहास को नई दिशा दी— "अत्तदीपा विहरथ, अत्तसरणा अनञ्ञसरणा; धम्मदीपा, धम्मसरणा।" (महापरिनिब्बाण सुत्त, दीर्घ निकाय) अर्थात— "स्वयं अपना दीपक बनो। स्वयं अपना आश्रय बनो। धर्म को अपना मार्गदर्शक बनाओ, किसी व्यक्ति के अंधानुकरण का सहारा मत लो।" यही गुरु पूर्णिमा का वास्तविक संदेश है। आज समाज में तथाकथित गुरुओं, चमत्कारवाद, अंधविश्वास, पाखंड, व्यक्तिपूजा और धार्मिक व्यापार का विस्तार हो रहा है। धर्म के नाम पर भय, भ्रम और आर्थिक शोषण का वातावरण निर्मित किया जा रहा है। ऐसे समय में भगवान बुद्ध का धम्म मानवता को विवेक, करुणा, नैतिकता और वैज्ञानिक दृष्टि का मार्ग दिखाता है। १. तथागत का गुरु-शोध और सत्य की खोज राजकुमार सिद्धार्थ गौतम ने ज्ञान की खोज में अपने समय के महान आचार्यों आलार कालाम और उद्दक रामपुत्र ...